I look forward to your feedback!


Monday, November 3, 2014

अनजान मुस्कान

अनजान मुस्कान  
गीतांजली गेरा 



कभी कभी अनजान मुस्कान दिल में उतर जाती है
पल भर में कच्चे धागों के रिश्ते बुन जाती है
वो अनजान मुस्कान कभी दिन को नयी पहचान देती है
तो कभी दिन की थकान मिटा देती है 
वो अनजान मुस्कान ग़मों को
बिना कुछ बोले सहला जाती है
वो अनजान मुस्कान....
कभी यहाँ तो कभी वहाँ मिल जाती है  

No comments:

Post a Comment