अनजान मुस्कान
गीतांजली गेरा
कभी कभी अनजान मुस्कान दिल में उतर जाती है

पल भर में कच्चे धागों के रिश्ते बुन जाती है
वो अनजान मुस्कान कभी दिन को नयी पहचान देती है
तो कभी दिन की थकान मिटा देती है
वो अनजान मुस्कान ग़मों को
बिना कुछ बोले सहला जाती है
वो अनजान मुस्कान....
कभी यहाँ तो कभी वहाँ मिल जाती है