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Saturday, October 31, 2020

नमस्कार दोस्तों

सबसे पहले मैं अभिनव जी को धन्यवाद करना चाहूँगी की उन्होंने इस विश्व रंग महोत्सव में मुझे आमन्त्रित किया। उसके बाद मैं धन्यवाद करूँगी ज़ूम  का जिसके माध्यम से मीलों की दूरियाँ घर बेठे ही पार  हो गयी  हैं। कल तक ऐसे समारोह की बस कल्पना ही की जा सकती थी 

ज़ूम तुझे है गीतांजली का शत शत कोटि प्रणाम

तूने कराया आज हमें इकठे यहाँ विराजमान


आए अब मैं आप सबको परिचित करती हूँ अपने सपने से जो मुझे इस ज़िंदगी में आगे बरने की प्रेरणा देता है। प्रस्तुत है मेरी कविता सपने 



चिल करो ना

करो ना करो ना, कुछ तो करो ना
बैठे हूँ क्यों मुँह लटकाये, आशावादी बनो ना
पिज़्ज़ा और आइसक्रीम पारलर बंद है तो क्या है
माँ की याद में आलू परांठें तो खाओ ना
बहामास का टूर कैंसिल हुआ तो क्या है
घर पे हैप्पीनेस क्रूज करो ना
करो ना करो ना, कुछ तो करो ना

मुँह पे पहना है मास्क तो क्या हुआ
आँखों से थोड़ी ख़ुशी बयां करो ना
social डिस्टन्सिंग का फेज है लेकिन
Facetime और wassapp ka advantage to लो ना
ज़िन्दगी ये ना मिलेगी दोबारा
सारे गिले शिकवे तो छोड़ो ना

गले नहीं लगा सकते तो क्या हुआ
आदाब अर्ज़ से ईद मुबारक तो बोलो ना
करो ना करो ना कुछ तो करो ना
बैठे हूँ क्यों मुँह लटकाये, आशावादी बनो ना

हर समय देते थे समय की कमी की दुहायी
अब तो करो इस समय की भरपायी
बैठे हो क्यों खाली, कलम अपनी पकरो ना
दो शब्द अपने लिए, तो दो मेरे लिए तो लिखो ना
अपने हुनर को तराशों दोस्तों
नए स्किल्ल्सेट का अपडेट तो करो ना
अपनी ज़िन्दगी में मतलब तो ढूंढो ना
करो ना करो ना कुछ तो करो ना

अकेले हो लेकिन अकेले नहीं हो
ज़ूम पे सबको नमस्ते/howdy तो बोलो ना

हो सके तो किसी के लिए कुछ तो करो ना
और कुछ नहीं तो एक थैंक यू तो बोलो ना
लाइफ में इतनी टेंशन नहीं दोस्तों
अपने को थोड़ा चिल करो ना
करो ना करो ना कुछ तो करो ना
बैठे हूँ क्यों मुँह लटकाये, आशावादी बनो ना

२०२० को नज़र नहीं लगी दोस्त
आशाओं को चस्मा पहन के तो देखो ना
कोरोना की वायरस सस्कैनिंग है ज़ारी
वायरस deletion तक, स्टे इन होम रहो ना
वायरस vaccine का इंतज़ार है लम्बा
पेशेंस का थोड़ा डिस्प्ले करो ना
ये दशा है गंभीर, इसका हल तो hai dhoondhna
Anthony fauci  की  जय जय कार करो ना
करो ना करो ना कुछ तो करो ना

बैठे हूँ क्यों मुँह लटकाये, आशावादी बनो ना


Saturday, May 16, 2020

Hindi Sangam Sahitya 2020

नमस्कार
इस चुनतीपूर्ण समय में आप सब के साथ एक बार फिर से मिलने अवसर मिला। इस कवी सम्मेलन में जोर्डने के लिए मैं हिंदी संगम साहित्य और ज़ूम का धन्यवाद् करना चाहती हूँ. 

ज़ूम तुझे है गीतांजलि का शत शत कोटि प्रणाम
तूने कराया आज फिर हम सबको इकठे विराजमान

मेरी पहली कविता समर्पित है इरफ़ान खान के लिए जिनके अभिनय की जितनी प्रशंसा की जय उतना काम है। इरफ़ान के शब्दों  When life gives you lemon, make lemonade...because it's magical! 

नीम्बू की शिकंजी (इर्र्फान खान) 

इरफ़ान  की इस फ़रियाद को
मक़बूल  करना ही पड़ेगा
जब ज़िन्दगी दे नीम्बू
तो शिकंजी को बनाना ही पड़ेगा
आपके लंचबॉक्स  में
नीम्बू छोटे हों या बड़े
कच्चे हों या पक्के
नीम्बू तो आपको निचोड़ना ही पड़ेगा
इरफ़ान  की इस फ़रियाद को
मक़बूल  करना ही पड़ेगा

ज़िन्दगी तो एक कारवाँ  हैं
किसका डी-डे  कब है
ये तो उस मदारी  को ही पता है
इसमें क्या राइट या रॉंग
चाहे ये होपान सिंह  की स्टीपलचेस
या फिर बस सिर्फ २४ घंटे  की रेस
चाहे आप हो पीकू  के ड्राइवर
या हों फिर बिल्लू जैसे बार्बर 
चाहे आप हों क़रीब क़रीब सिंगल 
या हों फिर माइटी हार्ट वारियर 
ये तो सब नेमसेक  हैं
सबकी  ज़िन्दगी का किस्सा 
यूँ होता तो क्या होता
इससे किसी को कुछ हासिल नहीं होता

दोस्तों इस बात को
चाहे हिंदी मीडियम  में बोले
या फिर अंग्रेज़ी मीडियम  में
जब ज़िन्दगी दे नीम्बू
तो शिकंजी बनानी ही पड़ेगी
इरफ़ान की विदाई मक़बूल करनी पड़ेगी
अब तो ये शिकंजी बनानी ही पड़ेगी

मै अपनी अगली कविता से आप सबको इस चुनातिपूर्ण समय आशावादी दृष्टिकोण रखने के लिए प्रेरित करना चाहती हूँ.
मेरी कविता का शीर्षक है चिल करो ना

चिल करो ना

करो ना करो ना, कुछ तो करो ना
बैठे हूँ क्यों मुँह लटकाये, आशावादी बनो ना
पिज़्ज़ा और आइसक्रीम पारलर बंद है तो क्या है
माँ की याद में आलू परांठें तो खाओ ना
बहामास का टूर कैंसिल हुआ तो क्या है
घर पे हैप्पीनेस क्रूज करो ना
करो ना करो ना, कुछ तो करो ना

मुँह पे पहना है मास्क तो क्या हुआ
आँखों से थोड़ी ख़ुशी बयां करो ना
social डिस्टन्सिंग का फेज है लेकिन
Facetime और wassapp ka advantage to लो ना
ज़िन्दगी ये ना मिलेगी दोबारा
सारे गिले शिकवे तो छोड़ो ना

गले नहीं लगा सकते तो क्या हुआ
आदाब अर्ज़ से ईद मुबारक तो बोलो ना
करो ना करो ना कुछ तो करो ना
बैठे हूँ क्यों मुँह लटकाये, आशावादी बनो ना

हर समय देते थे समय की कमी की दुहायी
अब तो करो इस समय की भरपायी
बैठे हो क्यों खाली, कलम अपनी पकरो ना
दो शब्द अपने लिए, तो दो मेरे लिए तो लिखो ना
अपने हुनर को तराशों दोस्तों
नए स्किल्ल्सेट का अपडेट तो करो ना
अपनी ज़िन्दगी में मतलब तो ढूंढो ना
करो ना करो ना कुछ तो करो ना

अकेले हो लेकिन अकेले नहीं हो
ज़ूम पे सबको नमस्ते/howdy तो बोलो ना
हो सके तो किसी के लिए कुछ तो करो ना
और कुछ नहीं तो एक थैंक यू तो बोलो ना
लाइफ में इतनी टेंशन नहीं दोस्तों
अपने को थोड़ा चिल करो ना
करो ना करो ना कुछ तो करो ना
बैठे हूँ क्यों मुँह लटकाये, आशावादी बनो ना

२०२० को नज़र नहीं लगी दोस्त
आशाओं को चस्मा पहन के तो देखो ना
कोरोना की वायरस सस्कैनिंग है ज़ारी
वायरस deletion तक, स्टे इन होम रहो ना
वायरस vaccine का इंतज़ार है लम्बा
पेशेंस का थोड़ा डिस्प्ले करो ना
ये दशा है गंभीर, इसका हल तो hai dhoondhna
Anthony fauci  की  जय जय कार करो ना
करो ना करो ना कुछ तो करो ना
बैठे हूँ क्यों मुँह लटकाये, आशावादी बनो ना

इसके साथ में आप सबसे विदा 

Sunday, July 17, 2016

maav2



माँ ख़ास होती है,  बहुतों से सुना है
माँ दिल का तार होती है, खुद महसूस किया है
माँ अकसर मैं दुविधा में पड़ती हूँ,
की कैसे बिना बोले, तू सब कुछ जान जाती है
मैं खुश हूँ, या दुखी हूँ, पल में भाप जाती है
माँ दिल का तार होती है, खुद महसूस किया है

माँ हमेशा मैं सोच में पड़ती थी
की तुझमें दिन रात खटने की
ये शक्ति आती कहाँ से थी
माँ हमेशा मैं सोच में पड़ती थी
मैं सोती थी तू जगती थी
मैं उठती थी तू जगती थी
तेरी आँखों की निंदिया तो
कभी बिस्तर न देखती थी
माँ हमेशा मैं सोच में पड़ती थी
माँ ख़ास होती है, ये बहुतों से सुना है
माँ दिल का तार होती है, ये खुद महसूस किया है


Tuesday, September 22, 2015

अपराजिता की परिभाषा


नारी तू है धैर्य की धरोहर, महाशक्ति का स्वरुप
तू है साहस की परिभाषा, तू है सृष्टि का प्रतिरूप
नारी तेरा जीवन परिक्षाओं का है बवंडर
हर परीक्षा अनोखी, पर साहस है तेरे अंदर
परीक्षा ही नहीं, परिणाम की समझ में भी है अंतर
जग समझे जग जीता, तू ही जाने तुझपे क्या बीता

नारी तुझे परीक्षाओं ने निरंतर है झंझोरा
तुझे है तराशा, तुझे है टटोला
तू हताश हुई, तू निराश हुई
तू झुकती रही, तू सहती रही
लेकिन इसनिर्दयी संसार ने
तेरे समर्पण को कायरता समझा

नारी इस संसार ने तुझको है ललकारा ,
तेरे इस असीम, प्यार को है नकारा
स्वाभिमान पे तेरे, प्रश्नचिन्ह है लगाया
सहनशीलता और संस्कारों का, मज़ाक है उड़ाया

नारी तेरे धैर्य की सीमा अब पार हुई
कोई न समझे, मैं तो जानू;
तेरी ये तपस्या समाप्त हुई
दिखा दे निर्दयी संसार को नारी
अबला नहीं, तू सबला है
साहस की चटान है तू,
नारी धर्म का मान है तू
तू है विद्रोही तू है तूफ़ान
तुझसे में है मादकता का उफान
तू है शूर, तू है नूर
तुझमें अब भी विश्वास है भरपूर
जीवन संघर्ष की मांग है ये
नारी तेरा मान है ये
जीवन संघर्ष की मांग है ये
नारी तेरा मान है ये








Wednesday, December 17, 2014

निर्भया तुम निर्भय नहीं निर्भयता की मशाल हो

निर्भया तुम निर्भय नहीं निर्भयता की मशाल हो
तुम १६ दिसंबर की रात, चली थी बस में हो सवार
अपनी ज़िन्दगी सुकून में जी रही थी,
सुनहरे सपने आँखों में पिरो रही थी
अचानक ज़िन्दगी का पलड़ा पलटा
संसार से बिदाई का समय आ थमका
ये बिदाई भी तारों की छाओं में थी
लेकिन शहनाई और सारंगी नहीं
सिसकियाँ और तन्हाई ही थी

रावण के भेस में राम सिंह ने '
अपनी सेना साथ
तुमपे किया निर्लज हो प्रहार
तुम राक्षस सेना से झूँझथि रही
चीखती रही, बिलखती रही
वो सिसकियाँ उन कानों से अनसुनी रह गयी
तुम्हारी हालत देख भयभीत ये दुनिया
शर्म से झुख गयी और
तुम्हें निर्भया पुकार कृतज्ञ कर गयी??
निर्भया मैं जानती हूँ तुम्हारा भी सपना था
लाल रक्त में नहीं लाल जोड़े में विदा होना था
निर्भया तुम निर्भय नहीं निर्भयता की मशाल हो

तुम्हारे जाने के बाद, दिल्ली की सड़के हैवानी लगती हैं
आज हूँ कल नहीं, ये अब रोज़ की परेशानी लगती है
कल तक लड़की होने पे गरूर करती थी
आज लेकिन इस रूख में भयभीत रहती हूँ

निर्भया मेँ चाहूँ भी तो तुमको निर्भया नहीं कह सकती
क्यूंकि तुम किसी युद्धभूमि में नहीं उतरी थी
ये नाम अमानत नहीं,ठहरे हुए समय की माँग थी
निर्भया तुम निर्भय नहीं निर्भयता की मशाल हो
हाँ निर्भया तुम निर्भय नहीं निर्भयता की मशाल हो












Monday, November 10, 2014

सोच की तदबीर ख़्वाबों की ताबीर


सोच की  तदबीर ख़्वाबों की ताबीर 
गीतांजली गेरा 



सोचा तूने की तू न कम है
तो इस ज़माने में कब दम है
भूला अगर तू खुद को तो
शेर की खूँखार भी कम है



इस नयी सोच की तदबीर कर ले
ख़्वाब की ताबीर को हक़ीक़त में बदल दे


Wednesday, November 5, 2014

बदलता वक़्त


अश्क़ आज कलम की स्याही बन गए
वो गलियां वो चौबारे वीराने हो गए
जो कल ख्वाबों के साये थे
आज ख़ौफ़ में बदल गए