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Tuesday, September 22, 2015

अपराजिता की परिभाषा


नारी तू है धैर्य की धरोहर, महाशक्ति का स्वरुप
तू है साहस की परिभाषा, तू है सृष्टि का प्रतिरूप
नारी तेरा जीवन परिक्षाओं का है बवंडर
हर परीक्षा अनोखी, पर साहस है तेरे अंदर
परीक्षा ही नहीं, परिणाम की समझ में भी है अंतर
जग समझे जग जीता, तू ही जाने तुझपे क्या बीता

नारी तुझे परीक्षाओं ने निरंतर है झंझोरा
तुझे है तराशा, तुझे है टटोला
तू हताश हुई, तू निराश हुई
तू झुकती रही, तू सहती रही
लेकिन इसनिर्दयी संसार ने
तेरे समर्पण को कायरता समझा

नारी इस संसार ने तुझको है ललकारा ,
तेरे इस असीम, प्यार को है नकारा
स्वाभिमान पे तेरे, प्रश्नचिन्ह है लगाया
सहनशीलता और संस्कारों का, मज़ाक है उड़ाया

नारी तेरे धैर्य की सीमा अब पार हुई
कोई न समझे, मैं तो जानू;
तेरी ये तपस्या समाप्त हुई
दिखा दे निर्दयी संसार को नारी
अबला नहीं, तू सबला है
साहस की चटान है तू,
नारी धर्म का मान है तू
तू है विद्रोही तू है तूफ़ान
तुझसे में है मादकता का उफान
तू है शूर, तू है नूर
तुझमें अब भी विश्वास है भरपूर
जीवन संघर्ष की मांग है ये
नारी तेरा मान है ये
जीवन संघर्ष की मांग है ये
नारी तेरा मान है ये