Geetanjali's Kavyalaya
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Monday, November 10, 2014
सोच की तदबीर ख़्वाबों की ताबीर
सोच की तदबीर ख़्वाबों की ताबीर
गीतांजली गेरा
सोचा तूने की तू न कम है
तो इस ज़माने में कब दम है
भूला अगर तू खुद को तो
शेर की खूँखार भी कम है
इस नयी सोच की तदबीर कर ले
ख़्वाब की ताबीर को हक़ीक़त में बदल दे
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