माँ ख़ास होती है, बहुतों से सुना है
माँ दिल का तार होती है, खुद महसूस किया है
माँ अकसर मैं दुविधा में पड़ती हूँ,
की कैसे बिना बोले, तू सब कुछ जान जाती है
मैं खुश हूँ, या दुखी हूँ, पल में भाप जाती है
माँ दिल का तार होती है, खुद महसूस किया है
माँ हमेशा मैं सोच में पड़ती थी
की तुझमें दिन रात खटने की
ये शक्ति आती कहाँ से थी
माँ हमेशा मैं सोच में पड़ती थी
मैं सोती थी तू जगती थी
मैं उठती थी तू जगती थी
तेरी आँखों की निंदिया तो
कभी बिस्तर न देखती थी
माँ हमेशा मैं सोच में पड़ती थी
माँ ख़ास होती है, ये बहुतों से सुना है
माँ दिल का तार होती है, ये खुद महसूस किया है
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